Keshav Vidyapeeth Samiti

Chairman's desk (Keshav Vidyapeeth)

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आद्य सरसंचालक प.पू. डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार के जन्मशताब्दी वर्ष 1989 में समाज के कुछ वरिष्ठजनों ने केशव विद्यापीठ समिति की स्थापना की। समिति द्वारा देश की युवा पीढ़ी को राष्ट्र भक्ति, समाज बोध, नैतिक व आध्यात्मिक मूल्यों से युक्त नागरिक बनाने के लिए श्रेष्ठ शिक्षण संस्थान प्रारंभ करने का लक्ष्य तय किया गया। इस क्रम में शंकर लाल धानुका उच्च माध्यमिक आदर्श विद्या मन्दिर जामडोली प्रथम शिक्षण संस्थान है। इसमें न केवल राजस्थान के विभिन्न जिलों वरन् अन्य प्रान्तों के भैया कक्षा षष्ठी से द्वादशी तक आवासीय व्यवस्था में रहकर शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, राष्ट्रभक्ति, नैतिकता आदि के सद्संस्कार ग्रहण कर रहे हैं।
इस विद्या मंदिर में अध्ययनरत रहे अनेक भैया आज देश- विदेश में अनेक उच्च व प्रतिष्ठित पदों पर आसीन हैं। जिनमें से कुछ अखिल भारतीय प्रशासनिक सेवाओं में, तो कुछ चिकित्सा एवं इंजीनियरिंग के क्षेत्र में स्वयं के साथ देश व समाज को सम्मान प्रदान कर रहे हैं। संस्था को अपने इन होनहार पूर्व छात्रों पर गर्व है।
शंकर लाल धानुका उच्च माध्यमिक आदर्श विद्या मन्दिर, जामडोली को राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर द्वारा श्रेष्ठ परीक्षा परिणाम तथा अन्य मापदण्डों पर मूल्यांकन कर अनेक बार प्रथम व द्वितीय स्थान पर पुरस्कृत व सम्मानित किया गया है। यह संस्थान आज प्रदेश व देश की अग्रणी शिक्षण संस्थाओं में अपना महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है।
मैं इसके उत्तरोत्तर विकास, गरिमा एवं गौरव को अक्षुण्ण रखते हुए आगे बढ़ने के लिए मंगल कामना करता हूँ।

प्रो. जगदीश प्रसाद सिंघल
(पूर्व कुलपति, राजस्थान विश्वविद्यालय)
अध्यक्ष-केशव विद्यापीठ समिति

सचिव-केशव विद्यापीठ समिति

‘पुराणमित्येव न साधु सर्वं, न चापि सर्वं नवमित्यवद्यम्।’ शास्त्रों में घोषणा की गई है कि जो कुछ परंपरा से चला आ रहा है, वही सब कुछ श्रेष्ठ है, ऐसा हमारा मानना नहीं है, किंतु ऐसा भी नहीं है कि जो कुछ आधुनिक है, वही प्रशंसनीय है। भाव यह है कि हमारी प्राचीन ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान द्वारा उद्घाटित नये क्षितिज, इन दोनों का उचित सम्मिश्रण ही आदर्श नयी पीढी़ का निर्माण कर सकता है। इसी शास्त्रीय मान्यता का अनुसरण करते हुए केशव विद्यापीठ द्वारा संचालित अग्रणी विद्यालय ‘शंकर लाल धानुका उच्च माध्यमिक आदर्श विद्या मंदिर’ गत तीन दशक से विद्यार्थियों के रूप में राष्ट्र निर्माण के उपकरण तैयार करता आ रहा है। मुझे प्रसन्नता है कि यहाँ से निकले अनेक विद्यार्थियों ने अपने संस्कारों और ज्ञान की प्रभा से राष्ट्र और समाज में प्रकाश बिखेरा है और अपने इस संस्थान का गौरव बढ़ाया है। केशव विद्यापीठ न तो पुरातनपंथी ही है और न लकीर का फकीर ही। ‘आ नो भद्रा ऋतवो यन्तु विश्वतः’ (सभी दिशाओं से ताजा हवाओं यानि ज्ञान के प्रकाश को आने दो) जैसे वैदिक उद्घोष में अटूट श्रद्धा रखने वाले हम, शिक्षा को सदैव राष्ट्र निर्माण का उपकरण मानते है, केवल आजीविका का साधन मात्र नहीं। इसीलिये यहाँ केवल पुस्तकीय ज्ञान पर ही जोर नहीं दिया जाता, अपितु छात्रों के सर्वांगीण विकास और जीवन पथ के सही दिग्दर्शन को लक्ष्य बनाया जाता हैं। इसी बलबूते पर छोटी सी अवधि में इस संस्थान ने शिक्षा के क्षेत्र में अनेक प्रतिमान स्थापित करते हुए, शैक्षिक जगत में अपना विशिष्ट स्थान बनाया है। हमारे इन विनम्र प्रयासों को देश और राजस्थान के विभिन्न भागों के राष्ट्रप्रेमी अभिभावकों का अपार स्नेह मिला है और अभी भी अनवरत मिल रहा है। संस्कार युक्त शिक्षा की गंगा का यह अविरल और निर्मल प्रवाह इसी प्रकार चलता रहे और आप सभी का स्नेह सदा की भाँति संस्थान को मिलता रहे, यही कामना है। ‘ध्येय साधना अमर रहे’।
ओमप्रकाश गुप्ता
सचिव-केशव विद्यापीठ समिति

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